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पूर्व चेयरमैन फरीदपुर का बेटा, रिठौरा का आढ़ती फरार

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बरेली: राशन कालाबाजारी के जिस राज की पर्देदारी हो रही थी, पुलिस उसकी तह तक पहुंच गई है। बतौर माफिया फरीदपुर नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन लालाराम के बेटे रविंद्र का नाम खुल गया। वह आढ़ती भी पुलिस के रडार पर आ गया है, जिसे सब मिलकर बचाने में लगे थे। राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम लिमिटेड का मुंशी राकेश भी बेनकाब हो गया। उसी ने पिकअप लोडर वाहन से माल निकलवाया था। पुलिस के हरकत में आते ही सभी आरोपित फरार हो गए हैं। ये नहीं हाथ आते तो पुलिस कुर्की की कार्रवाई करेगी।

रिठौरा के खाद्यान्न घोटाले में पुलिस की जांच से एक के बाद एक नामों का खुलासा होता चला गया। पुलिस गिरफ्तारी से पहले साक्ष्य जुटाने में जुटी थी। अब उसे साक्ष्य भी मिल गए। साफ हो गया कि जो माल पकड़ा गया है वह सरकारी है। भुता के सरकारी गोदाम से ही निकाला गया था। सच्चाई सामने आते ही गोदाम मालिक कमल गुप्ता, फरीदपुर के पूर्व चेयरमैन लालाराम का बेटा रविन्द्र, गोदाम का मुंशी राकेश भागे हुए हैं। पुलिस तीनों को तलाश रही है। राकेश की तलाश में मंगलवार को भी दबिश दी। विवेचक सुनील राठी का कहना है कि अगर आरोपित हाथ नहीं आए तो उनके खिलाफ कोर्ट से वारंट हासिल किया जाएगा। आरोपितों के खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा कर लिए गए हैं

पल्लेदारों ने खोल दिया राज- बोले हमने ढोए थे कट्टे

जासं, बरेली: पुलिस की जांच के दौरान एसडब्ल्यूसी गोदाम का इंचार्ज सुमित पुलिस से कह रहा था कि माल यहां से नहीं गया। उसके संज्ञान में नहीं है। जब पुलिस ने कट्टों का मिलान कराया तो पता चला कि सरकारी गोदाम व पिकअप वाहन में जब्त किए गए कट्टे एक समान हैं। बावजूद इसके गोदाम इंचार्ज सच कुबूलने को तैयार नहीं था। विवेचक सुनील राठी ने मंगलवार को पल्लेदारों से पूछताछ की। करीब दस पल्लेदारों के बयान दर्ज किए गए। पल्लेदारों ने सच्चाई बयान की तो कालाबाजारी की पर्ते उधड़ती चली गई। पल्लेदारों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने ही गोदाम से कट्टे गाड़ी में लोड किए थे। पुलिस को बस यही सुबूत चाहिए था। गोदाम से सरकारी कट्टे बाहर आने का सुबूत पुलिस के हाथ लग गया।

बरेली : किसी भी सरकारी अमले के लिए यह बेहद शर्मनाक स्थिति है। उसने जिस बात से लिखित में इन्कार किया, वह जांच हुई तो उसका दावा झूठा निकला। राशन सरकारी था। यह पिकप गाड़ी के मालिक और गोदाम के पल्लेदारों ने बता दिया। अब जिला पूर्ति अधिकारी सीमा त्रिपाठी, मंडी समिति सचिव और पूर्ति निरीक्षक दिलीप कुमार कि मुंह से कहेंगे कि झूठ बोला था। खैर उनके फंसने का पुलिस ने इंतजाम कर दिया है। अब डीएम के फैसले का इंतजार है।

जब रात में तत्कालीन एसपी देहात डॉ. सतीश कुमार ने जब रिठौरा में छापा मारकर राशन पकड़ा था तो अगले दिन ही ‘जागरण’ ने साफ कर दिया था कि कालाबाजारी का यह बड़ा मामला है, उसके बावजूद डीएसओ और उनके मातहत रफा-दफा करने में लग गए। लिखकर दे दिया कि राशन सरकारी नहीं है। कट्टंों पर मुहर और कोड नहीं है। लिहाजा चावल प्राइवेट है। बाद में यही काम मंडी समिति ने अंजाम दिया। सचिव ने जांच के लिखित में दिया कि चावल सरकारी नहीं है। पुलिस ने भी गोदाम पर छापा मारकर पिकअप पकड़ी तो लेकिन तभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि उसमें 

पल्लेदारों ने खोल दिया राज- बोले हमने ढोए थे कट्टे

जासं, बरेली: पुलिस की जांच के दौरान एसडब्ल्यूसी गोदाम का इंचार्ज सुमित पुलिस से कह रहा था कि माल यहां से नहीं गया। उसके संज्ञान में नहीं है। जब पुलिस ने कट्टों का मिलान कराया तो पता चला कि सरकारी गोदाम व पिकअप वाहन में जब्त किए गए कट्टे एक समान हैं। बावजूद इसके गोदाम इंचार्ज सच कुबूलने को तैयार नहीं था। विवेचक सुनील राठी ने मंगलवार को पल्लेदारों से पूछताछ की। करीब दस पल्लेदारों के बयान दर्ज किए गए। पल्लेदारों ने सच्चाई बयान की तो कालाबाजारी की पर्ते उधड़ती चली गई। पल्लेदारों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने ही गोदाम से कट्टे गाड़ी में लोड किए थे। पुलिस को बस यही सुबूत चाहिए था। गोदाम से सरकारी कट्टे बाहर आने का सुबूत पुलिस के हाथ लग गया।

भरा चाव कहां से लाया गया है। बाद जब जब प्रमुख सचिव संजय आर भूसरेड्डी ने बरेली आगमन पर एसएसपी से नाराजगी जताई, तब पुलिस हरकत में आई और राजफाश हुआ। इसी के साथ पूर्ति विभाग और मंडी समिति का असल चेहरा भी सामने आ गया। दोनों विभाग किस तरह माफिया से मिलकर गरीबों के राशन पर डाका डलवा रहे हैं, पुष्टि हो गई। होना तो यह चाहिए था कि राशन माफिया की तरह विभागीय गुनहगार के नाम भी जांच में दर्ज कर दिए जाते लेकिन डीएम ने जिन एडीएम एफआर मनोज पाण्डेय जांच दी है, वह लंबे अवकाश पर चल गए। मंडी समिति के सचिव, पूर्ति निरीक्षक, एसओ हाफिजगंज और चौकी इंचार्ज रिठौरा के बयान ही दर्ज सके। तब जबकि कह यह रहे थे कि दो-तीन दिन में जांच पूरी करके डीएम को भेज देंगे।

पुलिस के बाद अब डीएम की जांच रिपोर्ट भी मंगाई जाएगी। जिस स्तर पर भी लापरवाही बरती गई होगी, रिपोर्ट देखने के बाद उन पर कार्रवाई कराई जाएगी।

रणवीर प्रसाद, कमिश्नर -मामले को देख रहे एसपी देहात से बुलाकर बात की थी। उसके बाद ही पुलिस के स्तर से पूरा मामला खोला गया है। अब एडीएम एफआर से भी जांच रिपोर्ट जल्द देने के लिए कहेंगे।

वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम -गोदाम से जब्त किया गया खाद्यान्न सरकारी गोदाम से ही निकाला गया था। पल्लेदारों ने सच्चाई बयां कर दी है। बता दिया कि गोदाम से ही गाड़ी में कट्टे लोड किए थे। अब फरार आरोपितों की तलाश में दबिश दी जा रही है।- सुनील राठी, विवेचक