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माइग्रेन: देश के 15 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को ये सिरदर्द आखिर क्यों हो रहा है

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19वीं सदी में पाया गया कि माइग्रेन महिलाओं को ज्यादा होता है. उनके ‘कमदिमाग’ होने को इसकी वजह माना गया.

इंटरनेशनल हेडेक सोसायटी (आईएचएस) के अनुसार अकेले भारत में ही 15 करोड़ से भी ज्यादा लोग माइग्रेन से पीड़ित हैं. माइग्रेन कोई आम सिरदर्द नहीं. आंखों के आगे अंधेरा छाने से लेकर उल्टियां होने जैसे लक्षणों के साथ आने वाले इस दर्द से दुनिया से लगभग सभी देश पीड़ित हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार साल 1990 से 2016 तक हुए सर्वे के मुताबिक माइग्रेन का दौरा सिक लीव के रूप में निजी और सरकारी कंपनियों पर भारी बर्डन डालता है. अपनी गंभीरता के बावजूद ये कुछ ऐसी बीमारियों में से है जिसपर कोई भी देश लगभग नहीं के बराबर फंडिंग कर रहा है. हर पांच में से एक महिला पर असर डालने वाली ये बीमारी आखिर क्या है और इसकी वजहें क्या हैं, इस बारे में शोधकर्ताओं का अलग-अलग नजरिया है.
ऐसे होती है शुरुआत
आम बोलचाल की भाषा में माइग्रेन को अधकपारी भी कहते हैं. हल्के-हल्के दर्द से इसकी शुरुआत होती है जो जल्द ही सिर के एक हिस्से को गिरफ्त में ले लेती है. ये दर्द ऐसा होता है जैसे सिर पर हथौड़ा चल रहा हो. ये कुछ घंटों से लेकर दो दिनों तक भी बना रह सकता है. इसमें सिरदर्द के साथ-साथ जी मिचलाना, उल्टियां, आंखों के सामने अंधेरा होना जैसी कई समस्याएं होती हैं. अलग-अलग लोगों में कुछ कॉमन तो कुछ अलग लक्षण भी दिखते हैं. सिरदर्द और मतली के अलावा फोटोफोबिया यानी रोशनी से परेशानी और फोनोफोबिया यानी शोर से परेशानी जैसी समस्याएं भी होती हैं. दूसरे सिरदर्द आमतौर पर दर्दनिवारक से ठीक हो जाते हैं, वहीं माइग्रेन का अटैक एक बार आए तो बमुश्किल ही दवा से जाता है.

क्यों होता है माइग्रेन
इस सिरदर्द का इतिहास बहुत पुराना है या यूं भी कहा जा सकता है कि ये उन इंसानी बीमारियों जिनका रिकॉर्ड रखा जाने लगा था, में चुनिंदा सबसे पुरानी बीमारियों में से है. इजिप्ट में पाए गए दस्तावेजों में भी माइग्रेन की तरह के सिरदर्द का उल्लेख मिलता है. ऐसा माना जाता है कि ये दस्तावेज ईसापूर्व 12वीं सदी के हैं. इसमें नजरों के सामने अंधेरा छाने के साथ तेज दर्द और मतली या उल्टियां होने जैसे लक्षणों का उल्लेख है जो माइग्रेन का लक्षण है.

इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि माइग्रेन शब्द का जन्म ग्रीक शब्द हेमिक्रेनिया से हुआ जिसका मायने हैं आधा सिर. माना जाता था कि इस तरह का तेज दर्द बुरी शक्तियों के असर से होता है और इसलिए इसके इलाज की प्रक्रिया बेहद तकलीफ देने वाली थी. इसमें मरीज को मंदिर लेकर सिर में सुइयां चुभोई जाती थीं.

19वीं सदी में पाया गया कि माइग्रेन महिलाओं को ज्यादा होता है. उनमें दिमाग कम होने को इसकी वजह माना गया. यहां तक कि कई शब्दकोषों में भी माइग्रेन को ‘पगलाई हुई घरेलू स्त्री’ के समकक्ष रखा गया है. ऐसी ही कई वजहें हैं जिसके कारण ये बीमारी एक स्टिग्मा की तरह सामने आई, जिसके बारे में बात करने से मरीज डरने लगे.

जैसा कि शोध बताते हैं कि हर पांच में से एक महिला माइग्रेन का शिकार होती है, वहीं हर पंद्रह में से एक पुरुष. हालांकि इस बीमारी के कारण अब भी अज्ञात हैं. इसपर लगातार शोध चल रहा है. यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना में हुए ताजा शोध के अनुसार हार्मोनल बदलाव भी इसकी एक वजह हो सकता है, जैसे पीरियड के पहले या प्रसव के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम होने की वजह से भी दर्द होता है. इस दर्द को लाइफस्टाइल से भी जोड़ा जा रहा है. जैसे कैफीन, निकोटिन, बहुत अधिक चॉकलेट खाना, देर तक सोना, कम सोना जैसी बातें भी अधकपारी की वजहों में शामिल हो सकती हैं, हालांकि अभी वैज्ञानिक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके हैं.

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण
माइग्रेन की शुरुआत किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन लड़कियों में ये आमतौर पर किशोरावस्था या फिर मातृत्व के दौरान होता है. लक्षणों के आधार पर इसे दो श्रेणियों में रखा जा सकता है, पहला है सामान्य माइग्रेन. इसमें दर्द बिना किसी ‘औरा’ के एकाएक शुरू हो जाता है. दूसरे प्रकार यानी क्लासिकल माइग्रेन में दर्द से पहले इसके संकेत मिलते हैं, जैसे कि आंखों के सामने बैंगनी लकीरें बनना, रौशनी चुभना, आंखों के सामने 10 से 15 मिनट के लिए एकदम अंधेरा छा जाना, कंधों में अकड़न और जी मिचलाना. इसके बाद दर्द शुरू होता है. सिर के एक तरफ होने वाला ये दर्द कई बार एक से दूसरी तरफ ट्रेवल भी करता है, साथ में उल्टियां होना और रोशनी व आवाज से परेशानी जैसे लक्षण दर्द के दौरान रहते हैं. दर्द कुछ घंटों से लेकर गंभीर केस में 72 घंटों तक भी रहता है. इस दौरान मरीज एकदम असहाय हो जाता है, कई लोगों में ये दर्द इतना तेज होता है कि वे खुद को नुकसान भी पहुंचाने लगते हैं.

माइग्रेन यानी केवल सिर में दर्द नहीं, बल्कि शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी इसका असर होता है-
आंखें – इसके दर्द के साथ ही आंखों में संवेदनशीलता भी साथ आती है. ऐसा तब होता है जब आंखों और मस्तिष्क के बीच जाने वाली सिग्नल के बीच बाधा पहुंचती है. मरीज की आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है और बीच-बीच में कौंध सी दिखती है. रोशनी में रहने पर दर्द और बढ़ता है.
कान – तीन-चौथाई रोगियों को माइग्रेन के अटैक के दौरान आवाज के प्रति संवेदनशीलता महसूस होती है. शोध में यह बात सामने आई है कि माइग्रेन के दर्द का प्रभाव इन इंद्रियों पर अधिक पड़ता है.
पेट – मितली और उल्टी माइग्रेन के साथ होने वाली सबसे सामान्य परेशानी है. ऐसा मस्तिष्क की संरचना और ब्रेनस्टेम के बीच संबंध हो सकता है जो कि मितली और उल्टी को नियंत्रित करता है. हॉर्मोन स्तर में होने वाले परिवर्तन भी इसमें अहम रोल अदा करते हैं.

मस्तिष्क – दर्द के दौरान न्यूरो ट्रांसमीटर्स छोटे ब्लड वेसल्स और मस्तिष्क को कवर करने वाले मेंब्रेन्स में प्रवाहित हो जाते हैं. जिससे सूजन हो जाती है और रोगी को ऐसा महसूस होता है, जैसे उनके बालों में भी दर्द हो रहा है. दो-तिहाई रोगियों में सिर के एक हिस्से में ही दर्द महसूस होता है लेकिन कई रोगी ऐसे भी होते हैं जिनमें जबड़े और गर्दन तक दर्द चला जाता है.
सिर – लगभग आधे से अधिक माइग्रेन रोगियों में चक्कर जैसी स्थिति पैदा होती है. ऐसा माइग्रेन पेन चैनल और मस्तिष्क के उस हिस्से में जो नियंत्रण करने का काम करता है उनके बीच कनेक्शन होता है.
नाक – माइग्रेन के मरीजों में दर्द के कारण पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, इस वजह से नाक और आंख से पानी आना या लाल हो जाने की शिकायत होती है.

क्या हैं माइग्रेन के मुख्य ट्रिगर
पुराना पड़ चुका पनीर, ज्यादा नमक वाली चीजें और किसी भी तरह का प्रोसेस्ड या डिब्बाबंद खाना
खाने में मिलाया जाना वाला रंग और तरह-तरह की आर्टिफिशियल खुशबू
तेज रोशनी, तेज धूप, चमक, तेज आवाज वाला संगीत
बहुत तेज गंध, फिर चाहे वो पेंट की हो या फिर परफ्यूम की, माइग्रेन दे सकती है
सोने और जागने का रुटीन गड़बड़ रहना, जैसे कम सोना या ज्यादा नींद लेना
मौमस में बदलाव, जैसे गर्म से एकाएक ठंडी जगह जाना या फिर ठंडी जगह से गर्म मौसम में जाना
कुछ खास तरह की दवाएं, जैसे गर्भनिरोधक दवाएं

माइग्रेन का इलाज
इसे विश्व स्तर पर सभी बीमारियों में सातवीं सबसे अक्षम बना देने वाली बीमारी माना गया है. इस असहनीय सिरदर्द को किसी भी साधारण दर्दनिवारक दवा से ठीक नहीं किया जा सकता. अगर आपको इस तरह का दर्द होता हो या परिवार में किसी को माइग्रेन हो तो डॉक्टर की मदद लें. कुछ जांचों और एमआरआई के जरिए पहले ये पक्का किया जाएगा कि ये दर्द माइग्रेन ही है या कोई दूसरी गंभीर वजह है. इसी आधार पर इलाज शुरू किया जाएगा. हालांकि इस दर्द का उपचार नहीं हो सकता, बल्कि डायबिटीज और थायरॉइड की तरह ही इसे मैनेज किया जा सकता है. साथ ही स्वस्थ जीवनशैली और उन सभी बातों को टालना, जिनकी वजह से दर्द (ट्रिगर) होता है, ये सावधानी भी बरती जानी चाहिए. किसी आम डॉक्टर की बजाए विशेषज्ञ यानी न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाकर जांच कराई जानी चाहिए ताकि बीमारी की जड़ तक पहुंचा जा सके.