Home जन ज्ञान …और जब आपके पास मंगल या अन्य ग्रहों से आएंगे फोन

…और जब आपके पास मंगल या अन्य ग्रहों से आएंगे फोन

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कुछ समय पहले स्टीफन हॉकिंग एक खास प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे. वो ये जानने की कोशिश कर रहे थे कि क्या पृथ्वी से दूसरे ग्रहों पर जाकर रहना संभव है. उनका मानना था कि 50 से 100 सालों के बीच पृथ्वी पर मानवीय जीवन मुश्किल होने लगेगा और तब हमें दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाएं तलाशनी होंगी. माना जा रहा है कि अगले दो दशकों में हम इस स्थिति में आ चुके होंगे जब दूसरे ग्रहों पर जाने वाले पृथ्वीवासियों से हमारी सीधी बात हो पाएगी.

क्या आपने उस दिन की कल्पना की है जब कोई मंगल ग्रह से आपको फोन करेगा और कहेगा कि वह कुछ दिनों के चेंज के लिए पृथ्वी पर आ रहा है. या आप अपने पड़ोसी से कहेंगे कि सोच रहा हूं कि मैं भी गैलेक्सी के अमुक ग्रह पर जाकर बस जाऊं. हैरानी की बात नहीं है कि तीन चार दशकों बाद ही इस तरह की बातें हकीकत में बदलती हुई दिखने लगें.

इस सदी के बाद पृथ्वी पर रहना होगा मुश्किल 


वैसे समय का तकाजा भी यही है कि अब हमें पृथ्वी से परे उन ग्रहों या सौरगंगा में ठिकाने देखें, जहां कुछ सौ सालों बाद या कुछ हजार सालों बाद मानव की बस्तियां बसाई जा सकें. जाकि मानव जिंदा रहे.
दुनिया के प्रसिद्ध भौतिक और अंतरिक्ष विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग को आशंका थी 2100 सदी खत्म होते होते मानव प्रजाति के सामने तमाम तरह के ऐसे संकट आने लगेंगे कि उन्हें दूसरे ग्रहों पर जाना ही होगा. उन्होंने बार बार अपने भाषणों में कहा था कि मनुष्य और धरती पर रहने वाली जीव-जंतुओं की प्रजातियां तभी बचेंगी, जबकि हम अन्य अनुकूल ग्रहों पर डेरा बसाएं.

स्टीफन हॉकिंग अपने निधन से पहले दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावना तलाशने में जुटे हुए थे

अगले 50 से 100 सालों में बढ़ जाएगा तापमान 
तमाम वैज्ञानिक मानते हैं कि अगले 50 से 100 सालों में धरती का तापमान इतना बढ़ जाएगा कि यहां रहना मुश्किल होता जाएगा.
जब ये सदी खत्म होगी, तब तक कृषि को बचाकर रख पाना मुश्किल हो जाएगा. धरती से पानी गायब होने लगेगा. ऐसी स्थिति में हमें वैकल्पिक साधनों की ओर देखना होगा.

स्टीफन हाकिंग का ये भी कहना था कि भविष्य में मौसम की तब्दीलियों के साथ नाभिकीय युद्ध या उल्का पिंडों की बौछार भी पृथ्वी के जीवन पर प्रतिकूल असर डाल सकती है.

मंगल ग्रह पर जाना होने वाला है संभव 
अंतरिक्ष में मानव को कदम रखे यूं तो 60 से ज्यादा साल हो चले हैं लेकिन अब धीरे धीरे अंतरिक्ष में उसकी गतिविधियां बढऩे लगी हैं. मंगल ग्रह पर जाने की बात सच्चाई में बदलने वाली है. इसके साथ ही शनि और गुरु ग्रहों तक हमारी ताक-झांक शुरू हो चुकी हैं. खगोल विज्ञानियों की नजर अपने सौरमंडल के अलावा अपार विस्तृत और रहस्यमयी सौरगंगा पर जाकर टिक गई है.

वैज्ञानिक मानते हैं कि इस सदी के बाद पृथ्वी का तापमान इतना बढ़ चुका होगा कि यहां रहना मुश्किल होने लगेगा

नासा के ही एक और वैज्ञानिक माइकल ग्रिफिथ कहते हैं अगर मानव प्रजाति को सैकड़ों, हजारों या लाखों साल और जीना है तो हमें दूसरे ग्रहों पर जाना ही होगा. वह कहते हैं, मुझको नहीं मालूम कि वो दिन कब आएगा लेकिन एक दिन ऐसा होगा जब दूसरे ग्रहों पर पृथ्वी की तुलना में ज्यादा लोग रह रहे होंगे.

दो तीन दशकों में शुरू होगी अंतरिक्ष में नई होड़
अगले दो तीन दशकों में ही अंतरिक्ष में मानवीय दौड़ कहीं तेज और कहीं पुख्ता तरीके से शुरू हो जाएगी. ऐसे संकेत मिले हैं कि दूसरे ग्रहों पर पृथ्वी जैसे हालात और पर्याप्त मात्रा में हवा-पानी हो सकते हैं. नई तकनीक और दमदार टेलीस्कोप की मदद से वैज्ञानिकों ने हाल के बरसों में दूसरी सौर गंगाओं में पृथ्वी सरीखे ग्रहों के होने का दावा किया है.
जिस तरह अंतरिक्ष विकास की तकनीक आगे बढ़ रही है, उससे तय है कि हम जल्दी ही प्रकाशवर्ष की दूरियों को काबू में करके दूसरी सौरगंगाओं में प्रवेश कर सकेंगे.

क्या गैलेक्सी में हैं पृथ्वी लायक ग्रह 
पिछले कई सालों में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने हमारे सोलर सिस्टम के बाहर कई ग्रहों का पता लगाया है. केपलर टेलीस्कोप ने अकेले 1000 से ज्यादा ग्रहों को ढूंढ निकाला है. ऐसे बाहरी ग्रहों पर भी जीवन हो सकता है. अगर इनका आकार पृथ्वी के समान हो और ये अपने तारे के गोल्डीलॉक्स ज़ोन में हों, यानी पृथ्वी की ही तरह, जहां तापमान ना तो बहुत ज्यादा हो और ना ही बहुत कम, तो उन पर जीवन की संभावना हो सकती है.

क्या गैलेक्सी में हैं सभ्यताएं
वैज्ञानिकों ने एक लाख आकाशगंगाओं के अध्ययन के बाद करीब 50 आकाशगंगाओं में अतिविकसित सभ्यता के संकेत देखे हैं. इन आकाशगंगाओं पर कुछ संदिग्ध इंफ्रारेड गतिविधियां दिखी हैं, जिनसे इन पर जीवन की संभावना जताई जा रही हैं.